Loksabha लोकसभा

लोकसभा
loksabha

लोकसभा loksabha General Knwledge

भारतीय संविधान के अनुसार  अनुच्छेद, यथा 81 तथा 331 में प्रावधान  के तहत भारतीय संसंद के लोकसभा loksabha इस सदन का गठन किया गया है |लोकसभा loksabha संसद का कनिष्ट सदन है |

लोकसभा
loksabha

स्वतंत्र भारत में पहली  लोकसभा loksabha का गठन 17 अप्रैल, 1952 को हुआ था। और लोकसभा की पहली बैठक 13 मई, 1952 को संपन्न हुई थी।

वर्तमान में लोकसभा loksabha के अधिकतम ५५२ सदस्य हो सकते है |

जिसमे से ५३० विभिन्न राज्यो से २० केन्द्र्शषित  प्रदेशो से तो २ सदस्यों का चयन राष्ट्रपती एंग्लो इंडियन समुदाय से कर सकते है यदि उन्हें ये आभास हो के उस समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है |

 लोकसभा loksabha सदस्यों का निर्वाचन

भारतीय संविधान के अनुसार लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष तौर पर वयस्क भारतीय नागरिको द्व्यारा किया जाता है |

भारतीय संविधान के अनुसार भारत में १८ साल के आयु पूरा करने पर उसे वयस्क नागरिक माना जाता है |

लोकसभा loksabha का कार्यकाल / अवधी

लोकसभा loksabha का कार्यकाल या अवधी ५ साल की होती है |

पर राष्ट्रपती प्रधानमंत्री की सलाह पर इसे अवधी समाप्त होने से पूर्व भी विसर्जित कर सकते है |

लोकसभा  का कार्यकाल आपात परिस्थिती में १ साल के लिए बढाया भी जा सकता है | आपातकाल घोषणा समाप्त होने पर इसे ६ महीने की अवधि के लिए बढाया जा सकता है |

आपात घोषणा समाप्ति के बाद ६ महीने के अंदर लोकसभा का सामान्य चुनाव के द्वारा गठन आवश्यक होता है |

लोकसभा loksabha का अधिवेशन

लोकसभा का अधिवेशन १ साल में २ बार करना अनिवार्य है | लोकसभा के दो अधिविशानो के दरम्यान ६ महीने से ज्यादा अंतराल नहीं होना चाहिए | ऐसा तभी संभव है जब पिचले अधिवेशन से पहले ही लोकसभा बर्खास्त की गयी हो|

Loksabha का विशेष अधिवेशन

लोकसभा loksabha का यदि कोई भी अधिवेशन न चल रहा हो और यदि राष्टीय अपात घोषित हो तब उसे नामंजूर करने के लिए लोकसभा का विशेष अधिवेशन बुलाया जा सकता है |

इसके लिए लोकसभा के ११० सदस्यों द्व्यारा लोकसभा अध्यक्ष को लिखित सूचना दी जानी आवश्यक है | अगर लोकसभा के ११० सदस्य लिखित सूचना देते है तो राष्ट्रपति या लोकसभा अध्यक्ष को लोकसभा का  विशेष अधिवेशन बुलाना अनिवार्य है |

लोकसभा अध्यक्ष

लोकसभा loksabha अध्यक्ष का चयन लोकसभा के सदस्यों द्वारा बहुमत से किया

किया जाता है | लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल भी ५ साल का ही होता है | अगर लोकसभा पूर्व ही विसर्जित की जाती है तो लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल भी समाप्त हो जाता  है | लोकसभा के सदस्य बहुमत से भी उसे अपने पद से मुक्त कर सकते है |

लोकसभा loksabha उपाध्यक्ष

लोकसभा(loksabha) अध्यक्ष की तरह ही उपाध्यक्ष का चुनाव और कार्यकाल भी होता है | अध्यक्ष के तरह ही उपाध्यक्ष को भी लोकसभा सदस्य बहुमत से पद से मुक्त कर सकते है |

 

लोकसभा के अधिकार /शक्तिया

लोकसभा में सदस्य जनता द्वारा चुने जाते है | लोकसभा के सदस्य भारत के जनता का प्रतिनिधित्व करते है |इसलिए लोकसभा को बहुत ही व्यापक अधिक अधिकार प्राप्त है | इनमेसे कुछ महत्वपूर्ण अधिकार निचे दिए है |

  • अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष चयन

लोकसभा उसके ही अध्यक्ष तथा उप अध्यक्ष का चुनाव कराती है |और यदि उसे ऐसा लगे की वो अच्छी तरीके                            से कम नहीं कर रहे है तो लोकसभा को ये अधिकार है की ओ उसे पद से मुक्त भी कर सकते है |

  • भारत के लिए कानून का निर्माण करना

ये एक महत्वपूर्ण कार्य लोकसभा का होता है |लोकसभा देश के लिए  कानून का निर्माण कराती है |

और अगर कोई कानून उसे लगे की समय के साथ विसंगत हो चला है तो लोकसभा उसे बर्खास्त भी कर सकती है |

  • अपने सदस्य का निष्काशन

अगर कोई लोकसभा loksabha सदस्य लोकसभा के गरिमा का उलंघन करता पाया जाता है तो लोकसभा के पास यह अधिकार है की वो उसे सदन से निष्काषित करे | बाद में वो उसे रद्द करने का भी अधिकार रखता  है |

  • आपात घोषणा को रद्द करना

लोकसभा loksabha  सरकार द्वारा लगायी आपात घोषणा को भी विशेष अधिवेशन बुला कर उसे रद्द करने  का अधिकार रखती है |

  • वित्त विधेयक

ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण अधिकार लोकसभा के पास होता है | धन सम्बन्दी विधयेक पहले लोकसभा में ही  पारित किया जाता है |

अगर लोकसभा loksabha उसे मंजूर करती है तो राज्यसभा उसे केवल १४ दिन ही  अपने पास रख सकती है | वो उसे नामंजूर नहीं कर सकती और राज्यसभा द्वारा दिए गए सुजाव भी मानना  बाध्यकारी नहीं होता है|

 

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