Indian parliament भारतीय संसद

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Indian parliament /भारतीय संसंद

indian parliament,sansad,  भारतीय संसद

भारत ने स्वतंत्र होने के बाद जनतंत्र का स्वीकार किया है | जनतंत्र भी दो प्रकार के होते है एक होता है अध्यक्षीय(presidential) और संसदीय(parliament) |

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इसमेसे भारत ने संसदीय(parliament) जनतंत्र का स्वीकार किया है | तो अमेरिका में अध्यक्षीय जनतंत्र लागु है| तो चलिए देखते है भारतीय संसंद के रचना कैसे होती है ? इसे कार्य क्या है ? और इसके अधिकार क्या है-

भारतीय संसद (Indian parliament)की रचना

भारतीय संसद के दो मुख्य सदन होते है | राज्यसभा और लोकसभा | राज्यसभा को वरिष्ट सदन तो लोकसभा को कनिष्ट सभाग्रह कहते है |

लोकसभा:

लोकसभा भारतीय संसंद का कनिष्ट सदन है | भारतीय राज्यघटना के अनुसार लोकसभा में ५५२ कुल सदस्य होते है|

इसमें से ५३० सदस्य भारत के विभिन्न राज्यों में से चुने जाते है | लोकसभा के २० सदस्य केन्द्र्शषित प्रदेशो से लोकसभा में चुन के आते है, और बाकि दो सदस्य भारत का रास्ट्रपती एंग्लो इंडियन के तौर पर चुनता है|

लोकसभा का कार्यकाल ५ साल का होता है | पर आनीबानी के समय इसे बढाया जा सकता है | लोकसभा के अध्यक्ष का चयन लोकसभा के सदस्य बहुमत के द्व्यारा करते है |

राज्यसभा :

राज्यसभा भारतीय संसंद का वरिष्ट सदन है | भारतीय राज्यघटना के अनुसार राज्य सभा में कुल २५० सदस्य होते है | राज्य सभा कभी भी न विसर्जित होने वाला सदन है |

मतलब लोकसभा हर ५ साल के बाद विसर्जित हो जाती है लेकिन राज्यसभा कभी भी विसर्जित नहीं होती है | इसी लिए इसे स्थायी सदन भी कहते है | राज्य सभा पर राष्ट्रपति १२ सदस्यों का चयन करते है जो की अलग अलग क्षेत्रो से मान्यवर होते है |

और बाकि २३८ सदस्यों का चयन राज्यों के विधिमंडल के सदस्य करते है | राज्यसभा के हर सदस्य का कार्यकाल ६ साल का होता है | लेकिन सभी सदस्य एक साथ अपना कार्यकाल पूरा नहीं करते|

हर २ साल में कुल सदन के १/३ सदस्यों चयन होता है | इसलिए ये सदन कभी भी विसर्जित नहीं होता है | राज्य सभा का अध्यक्ष भारत के उप रास्ट्रपति होते है |

संसद के प्रमुख कार्य
  1. केंद्र सरकार पर नियंत्रण

    यह एक संसद  महत्त्वपूर्ण कार्य है| मंत्रिपरिषद की  वचनबद्धता की जवाबदेही तय करते हुए उस पर अपने नियंत्रण के अधिकार का प्रयोग संसद कर सकती है । धारा 75(3) में स्पष्ट किया गया है की मंत्रिपरिषद तभी तक ही बरक़रार रह सकती है जब तक के ससंद का  उसे विश्वास हासिल है ।

  2. कानून तैयार करना

    भारत की संसदका यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य है | भारतीय संसद भारत के लिए कानून बनाने का कार्य करती है | संसद संघ सूची और समवर्ती सूची (राज्य और केंद्र, दोनों की सूची में शामिल विषय) में शामिल तमाम विषयो पर कानून बना सकती है।

  3. वित्त नियंत्रण

    संसद, का लोकसभा सदन वित्त के कार्यक्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अधिकारों का प्रयोग करता  है। लोकसभा  को यह सुनिश्चित करना होता है कि सार्वजनिक निधि का उपयोग सही तरीके से उसकी अनुमति से हो।

  4. चर्चा,विचार विमर्श करना

    सभी प्रशासनिक निर्नायोकी की चर्चा सदन के पटल पर होती है। इसलिए  मंत्रिमंडल संसद का परामर्श हासिल कर सकता  है और अपनी गलतियों  के बारे में जान सकता  है, संसद के कारन ही पूरे देश को भी सार्वजनिक महत्त्व के विषयों के बारे में जानकारी मिल सकती  है।

  5. संवैधानिक कार्य

    संविधान में सिर्फ संसद को ही संविधानिक कार्य के अनुमति हासिल है | संविधान में संशोधन के लिए संसद कोई प्रस्ताव पेश कर सकता है लेकिन संसद भी संविधान के मूल ढांचे को संशोदित नहीं कर सकती । संशोधन का प्रस्ताव संसंद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है।

  6. निर्वाचन संबंधी कार्य

    संसद के सदस्य ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेते है । यह अपनी खुद के समितियों के विभिन्न सदस्यों, पीठासीन पदाधिकारियों और उप पीठासीन पदाधिकारियों का भी चयन करती है।

  7. न्यायिक कार्य

    संसद राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम और हाई कोर्ट के जज तथा संघ व राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों तथा सदस्यों और सीएजी पर  महाभियोग चला कर उन्हें कर्तव्य से मुक्त करने  का अधिकार रखती है।

 

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